(राहुल लारजे)

Saturday, August 28, 2010

दोस्ती का मतलब-कविता

भूल जाते हैं वे कि दोस्ती शब्द का मतलब कितना गहरा है

अपने स्वार्थ के लिए मित्रता का ढोंग करते हैं
कुछ लोग् आज-कल समाज में,
भूल जाते हैं वे कि दोस्ती शब्द का मतलब कितना गहरा है
उन के लिए दोस्ती महज
एक स्वार्थपूर्ति का जरिया है और
धोखा देना उन के लिए
एक उतम स्तर की कला है
भूल जाते हैं वे कि दोस्ती शब्द का मतलब कितना गहरा है

मतलब पूरा होने पे दोस्त की पीठ पर भी
छुरा घोंपने से बाज़ नहीं आते ऐसे लोग
फिर भी सरेआम कहते हैं कि
हम सच्चे परम सखा हैं
भूल जाते हैं वे कि दोस्ती शब्द का मतलब कितना गहरा है

कहाँ सुनने देखने को मिलता है वह उदाहरण
कि कृष्ण-सुदामा,अर्जुन
जैसे लोग आज भी हैं
कि राम-सुग्रीव और विभीषण
जैसे मित्र
जिन्होंने निभाया था अपने से कृतज्ञ होने
का कर्तव्य

आज मात्र दिखावा करते हैं वोह भीड़ में
अच्छे कपड़ों में दिखने वाले काले दिलों
के मालिक
अपनी  जन्नत को गुलज़ार करने की  फ़िक्र
उन को
साथियौं से दगा करने को जायज़ ठहराती है
तभी तो उन्होंने स्वयं को हर अहम मूल्यों से 
आज दर किनार कर लिया है
भूल जाते हैं वे कि दोस्ती शब्द का मतलब कितना गहरा है

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